विदाई
मार्च 1983 में अपनी भौतिक विद्यमानता के अन्तिम पलों में पिताजी ने मेरी बड़ी बहन बीबी अजीत कौर को बाबा नंद सिंह जी महाराज की पवित्र चरण-पादुकाओं को लाने के लिए कहा। बिस्तर पर लेटे-लेटे ही पूज्य पिता जी ने अपने प्रीतम की पादुकाओं को अपने उज्ज्वल-उन्नत ललाट पर श्रद्धा सहित सुशोभित किया और अपनी अन्तिम विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्होंने शरीर त्याग दिया। अपनी अन्तिम श्वास उनके सम्मुख लेते हुए वे उन्हीं पवित्र चरण-पादुकाओं में विलीन हो गए। इस तरह आनंदित हो उन्होंने अपने जीवन का अन्तिम श्वास भी बाबा नंद सिंह जी महाराज के पवित्र चरणों की पुनीत पादुकाओं में लिया। उन्होंने अपने आपको पवित्र चरण धूलि में संजो लिया, जिसमें वे जीवन भर विचरते रहे थे। उनका शरीर, चेतना और आत्मा अपने परम लक्ष्य बाबा नंद सिंह जी महाराज के चरण-कमलों में विलीन हो गई जो उनके प्रेम का परम लक्ष्य थे। उस समय ऐसा प्रतीत होता था कि वे बाबा नंद सिंह जी महाराज के पवित्र चरण-कमलों में ही विलीन हो गए थे, जो कि उनके अपने जीवन के वास्तविक स्रोत थे। उन्होंने अपना अन्तिम स्नान बाबा नंद सिंह जी महाराज की पवित्र चरण-धूलि में ही किय...