कमल के चरणों की खुशबू - विनम्रता और गरीबी
इस वृत्तांत को सुनाते हुए पिताजी ने बाबा नंद सिंह साहिब की एक साखी सुनाई- चरण-कमलों की यह सुगंधि क्या है? इस सुगंधि का असर क्या है? गुरु नानक पातशाह नम्रता का स्वरूप लेकर इस संसार में आए हैं तो निरंकार जब नम्रता का स्वरूप लेकर आता है तो उसका स्वरूप क्या होता है? साहिब आए हैं नम्रता और गरीबी के प्रकाश के साथ। निरंकार के स्वरूप के साथ, नम्रता और गरीबी के प्रकाश का असर क्या हो रहा है, इसे पितजी समझा रहे हैं। इस प्रकाश के साथ संसार को जीने की राह मिल जाती है। जिस समय निरंकार उस प्रकाश के साथ संसार में प्रकट होता है, आता है, इसका असर क्या और कैसे होता है? पिताजी बता रहे हैं- जेवडु आपि तेवड तेरी दाति ॥ जिनि दिनु करि कै कीती राति ॥ खसमु विसारहि ते कमजाति ॥ नानक नावै बाझु सनाति ॥ श्री गुरु ग्रंथ साहिब, अंग 349 यदि निरंकार नम्रता और गरीबी के साथ आया है तो नम्रता और गरीबी भी उतनी ही बड़ी होगी जो निरंकार को भी जीत लेती है। दातार पिता कौन सी दात बख़्श रहे हैं वे अपने चरण-कमलों की सुगंधि बख़्श रहे हैं। पिताजी कहने लगे कि जिसके हृदय में गुरु नानक पातशाह के चरण-कमल बसे हों...