इलाही प्रेम का शिखर
पिता जी बाबा नंद सिंह जी महाराज के पक्के सेवक थे। उन के अश्रु बाबा जी के लिए प्रेम व श्रद्धा-भावना को व्यक्त करते थे। उनके नयनों से प्रेम के आँसुओं की एक नदी बहती थी। वह इन आँसुओं से बाबा जी के पवित्र चरण-कमलों को स्नान करवाते थे। वह रूहानी आनंद में बच्चों की तरह विलाप करते। इससे उनका हृदय ही नहीं पिघलने लगता था बल्कि अन्य उपस्थित सत्संगियों का हृदय भी द्रवित हो जाता। उनका प्रेम व उनकी श्रद्धा-भावना देखकर स्वामी का हृदय इतना कोमल हो जाता कि वह स्वयं अपने प्रिय पुत्र का आँसुओं से स्नान करवा देते थे। प्रेमी जन व प्रभु-प्रीतम के इस आपसी प्रेम में उपस्थित सत्संगियों को बाबा जी की आन्तरिक निकटता प्राप्त हो जाती तथा हमारी तरह कई भाग्यशाली इस शाश्वत क्रीड़ा के प्रत्यक्ष दर्शन भी कर लेते थे। 4 मार्च 1980 का दिन तथा सुबह के जलपान का समय था। पिता जी हमारे गृह (संख्या 203, सैक्टर 33ए, चण्डीगढ़) बाहर गैराज के सामने खुले स्थान पर विराजमान थे। सरदार भगवंत सिंह जी, जो एयर फोर्स में सेवारत थे, का बेटा कमलजीत सिंह, उस समय पिता जी का निजी सेवादार था तथा पिता जी को जलपान करवाता था। पिता जी 5-6 ...