ऋद्धियाँ और सिद्धियाँ
ऋद्धियाँ-सिद्धियाँ एक संपूर्ण संत के चरणों की धूलि छानती फिरती है । किंतु अपने आप को संत कहलाने वाले बहुत से ऐसे होते है जो इन ऋद्धियों-सिद्धियों (सफलता और संपूर्णता की शक्तियों) को प्राप्त करने के लिए इनके पीछे भागते फिरते हैं। ऐसे वेषधारी संत ऋद्धियों-सिद्धियों की शक्तियों को प्राप्त करने के लिए इनसे सम्बद्ध देवियों की पूजा करते हैं। उन्हें नाम, प्रसिद्धि और बहुत से सेवकों की कामना हो ती है। जबकि परमात्मा के चरण-कमलों में लीन एक पूर्ण और सच्चे संत के पास इन सबके प्रति आँख उठाकर देखने की फुर्सत भी नही होती। ऋद्धि-सिद्धि की ये देवियाँ बहुत ही विनम्रता और श्रद्धा से परमात्मा द्वारा प्रदान किए जाने वाले उस पल की प्रतीक्षा में रहती हैं जब वे ऐसे पूर्ण संत की सेवा का अवसर पा सकें। एक सच्चे प्रेमी व सच्चे संपूर्ण त्यागी संत और सांसारिक के बीच यही एक उल्लेखनीय अंतर है। ऋद्धि-सिद्धि की शक्तियों के भूखे ये वेषधारी संत स्वयं अपना महत्त्व और प्रसिद्धि बढ़ाने के चक्करों में आसानी से उलझ जाते हैं। दूसरे लोगों को प्रभावित करने और उन्हें अपने...